ब्यौहारी सोनम ज्वेलर्स प्रकरण उप प्रभागीय न्यायाधीश पर माता पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं

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ब्यौहारी- पुलिस प्रशासन की व्यवस्था इतनी ज्यादा धीमी और क्षीण हो चुकी है कि वर्तमान परिवेश में अति गंभीर जीवन परिस्थितियों को झेल रहे एवं परेशानियों का सामना करने वाले वरिष्ठ नागरिक भी ब्योहारी के वर्तमान थाना ब्यौहारी की उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं, लगभग 30 वर्षो से सुप्रसिद्ध सराफा व्यापारी प्रतिष्ठान सोनम ज्वेलर्स नीव डालकर उसे अपने खून पसीने की कमाई से सीचने वाली जीवन भर की पूजी को निवेश करके सोनम ज्वेलर्स को समूचे परिवार का भरण पोषण करने वाली एवं ब्यौहारी सराफा ग्राहको के विश्वास का केन्द्र बिन्दु बन चुकी चंदा बाई सोनी पिता स्व.परमेश्वरदीन सोनी का प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र सोनम ज्वेलर्स इस समय अफरा तफरा के आलम से बिखर गया है, कभी किसी ने इतने सम्पन्न एवं क्षेत्र के जाने माने आभूषण प्रदाय केन्द्र के इस बदहाली की कभी कल्पना भी नही की होगी, समय कब करवट बदलना प्रारंभ कर दे जीवन की अनुकूलित अवस्था को तजकर , क्ल्ष्टि क्लेद्य एवं आपकी कलुषित, प्रतिकूलन की स्थिति को समय ने कब अपना लिया, चंदा बाई सोनी की इस दयनीय अवस्था को देखकर सभी आश्चर्य चकित भी हैं, चंदा बाई सोनी जो भारतीयता के नाते एक वरिष्ठ नागरिक भी हैं, जानी मानी सराफा प्रतिष्ठान की कर्ताधर्ता भी है,ं जब ब्योहारी थाना के थाना प्रभारी इनके साथ में इस प्रकार का सौतेला व्यवहार कर सकते हैं तो आम आदमी की हैसियत क्या है ? इस बात का अंदाजा बडी आसानी से लगाया जा सकता है, यदि ऐसा ना होता तो जीर्ण शीर्ण , वृद्ध , कमजोर शरीर को दंश लिए हुए चंदा बाई सोनी को पुलिस से परेशान होकर, न्यायालय प्रभागीय न्यायाधीश की दहलीज पर दस्तक देने की आवश्यकता ही नहीं पडती ।
सोनम ज्वेलर्स का प्रकरण न्यायालय में – फरियादिया चंदा बाई सोनी की एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की जा सकी तो अंततः विवश होकर उन्हे उप प्रभागीय न्यायाधीश श्री पी.के.पाण्डेय जी की न्यायालय में अपने मामले को सुपुर्द करना पडा , हलाकि इसके पूर्व चंदा बाई सोनी प्रकरण पंजीबद्ध करवाने हेतु ब्योहारी थाने गई थी परंतु प्रभारी प्रदीब दुबे के द्वारा मामले को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया गया और फरियादिया को न्यायालय उप प्रभाग की शरण में जाना पडा।
भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत प्रकरण – उप प्रभागीय न्यायाधीश के न्यायालय में विनोद कुमार सोनी पिता श्री परमेश्वरदीन सोनी ने माता पिता एवं वरिष्ठ नागरिक गण भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 आदेश क्र. 18 नियम 4 के तहत शपथपूर्वक आवेदन किया है कि वह पुत्रों के द्वारा दी जाने वाली मानसिक , शारीरिक प्रताडनाओं से त्रस्त होकर अमर पैलेस में निवासरत हैं, जबकि उनका स्वयं का घर भी है एवं सारी सुविधाओं के होने के उपरांत भी उनके पुत्रों विनीत सोनी एवं विवेक सोनी द्वारा संपत्ति को लेकर उन्हे प्रताडित किया जा रहा है जिससे ग्रसित अब विनोद सोनी अपनी मां एवं पत्नी के साथ घर छोडकर रहने को विवश हैं । दिनांक 03/01/19 से संपूर्ण प्रतिष्ठान व संपत्ति में विनीत सोनी , विवेक सोनी उनकी पत्नियों दुर्गेश नंदिनी सोनी एवं श्वेता सोनी ने चंदा बाई सोनी, विनोद सोनी एवं मिथिलेश सोनी के साथ अभद्र एवं आपराधिक व्यवहार कर रहे हैं उन्हें मानसिक रूप से प्रताडित कर रहे हैं , प्रतिष्ठान पर ताला लगा दिए हैं जिससे उनका व्यवसाय ठप्प हो गया है, अनैतिक तरीके से डराया एवं धमकाया भी जा रहा है , झूठे प्रकरणों में फंसाने का भय भी दिखाया जा रहा है एवं इसमें कोई दो मत भी नहीं है कि कब कोई दुर्घटना घटित हो जाय और बाद में पुलिस केवल पंचनामा और पोस्टमार्टम ही करने के काम आयेगी , यही होगा यदि पुलिस समय रहते अनावेदकों के विरूद्ध प्रकरण पंजीबद्ध नहीं करती है।
क्योकि यहां पर यह बात भी स्पष्ट ही है कि विवेक सोनी एवं विनीत सोनी , विनोद सोनी के पुत्र हैं तथा चंदाबाई सोनी पति स्व.परमेश्वरदीन सोनी के नाती हैं जिन्हे जीवोकोपार्जन हेतु भूमि, दुकाने, आर्थिक सहायता पहले ही उपलब्ध करवाई जा चुकी है परंतु असंतुष्टि वश अब ये लोग लालच पर उतर आये हैं एवं इसी वजह से अपने माता, पिता, दादी का जीना भी दूभर करके रखे हुए हैं जबकि वर्तमान न्याय व्यवस्था के अनुसार बालिक पुत्र का माता पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है, एवं यदि स्वस्थ एवं काबिल पुत्र योग्य होने के उपरांत भी अपने माता पिता का पालन पोषण नहीं करता है तो उसके लिए दण्ड का प्रावधान दिया गया है ।
बात चाहे कुछ भी हो परंतु थाना के वर्तमान अस्थाई प्रभारी प्रदीप दुबे ने प्राथमिकी दर्ज ना करके एक बडी समस्या को जन्म दे दिया है , यदि समय पर एफ आई आर नहीं होती है तो कोई भी अप्रिय वारदात घटित हो सकती है जिसका उत्तरदायी केवल पुलिस प्रशासन ही होगा।

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