दम तोड़ रही प्रधानमंत्री की आवास योजना ?

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अपात्र उठा रहे लाभ, जरूरतमंद हो रहे परेशान
अपूर्ण पड़े आवास के काम, स्वीकृत नहीं हो रहे नये आवास
मण्डला। जरूरतमंदों को शासन की आवास योजनाओं का लाभ आखिरकार नहीं मिल पा रहा है। कई तरह की योजनाएं केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा आवास उपलब्ध कराने के लिए चलाई तो जा रही है लेकिन योजनाओं का लाभ प्रदान करने में मनमानी धांधली और लापरवाही बरती जा रही है। एक ऐसी ही योजना इस समय काफी चर्चा में है। केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही के चलते दम तोड़ रही है। इस योजनांतर्गत शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में जरूरतमंद, पात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत अभी तक पुराने मकानों का काम पूरी तरह पूर्ण नही हो पाया है। ग्रामीण क्षेत्र में कई मकान या तो अधूरे पड़े हुए हैं, या बनाए ही नहीं गए है। जिसकी वजह से दूसरा चरण नए प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत शुरू नहीं हो पा रहा है। नगरीय क्षेत्र में इस योजना की धज्जियां उड़ा दी गई हैं। खासकर मण्डला नगर में प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत जबरदस्त धांधली की गई है व की जा रही है। सूत्रों की मानें तो यहां पर पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित हैं और कई अपात्र व्यक्ति इस योजना का लाभ शासन प्रशासन की सांठ गांठ से ले चुके हैं या लेने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसी स्थिति पूरे जिले में इस योजनांतर्गत हुई है। पूर्व से स्वीकृत मकानों का कार्य योजनांतर्गत पूरा नहीं हो पाया है। नये प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत जरूरतमंदों को लाभ देने की कार्यवाही शासन प्रशासन स्तर पर नहीं की जा रही है। जबकि इस संदर्भ में लगातार शासन प्रशासन से मांग भी की जा रही है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री आवास योजना लापरवाही की भेंट चढ गया है और जरूरतमंद इस योजना से लगातार वंचित हो रहे हैं। जनापेक्षा है जनप्रतिनिधि व शासन प्रशासन के सभी जवाबदार पूर्व स्वीकृत आवासों को पूर्ण करावें और नये आवास शीघ्र स्वीकृत कराकर जरूरतमंदों को प्रदान करते हुए योजनांतर्गत जिन्हें भी आवास का लाभ मिला है उसकी जांच कराई जावे कि आखिरकार पात्र व्यक्ति इस योजना का लाभ लिए हैं या नहीं ? जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जावे।
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अधर में क्यों लटके हुए हैं कई विकास कार्य
.आखिर कब होंगे पूरे ? कभी भी लग सकती है चुनाव अचार संहिता
मण्डला। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले में आखिरकार सभी अधूरे कामों को पूरा करने के लिए शासन प्रशासन द्वारा कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की जा रही है यही कारण है कि ढेर सारे निर्माण कार्य अधर में लटके हुए हैं। इसके अलावा कई तरह के विकासकार्य भी सही तरह से क्रियान्वित नहीं किये जा रहे हैं। विकास कार्य या तो अधर में लटके हैं या फिर शुरू कर पूर्ण नहीं किये जा रहे हैं। कभी भी पंचायत चुनाव व नगरीय निकाय चुनाव की अचार संहिता लग सकती है। अचार संहिता लगने के बाद चुनाव संपन्न होने के बाद विकास कार्य प्रभावित हो जाते हैं। या तो धीमी गति से चलते हैं या फिर पूरी तरह बंद कर दिये जाते है। प्रशासन चुनाव में व्यस्त हो जाता है और सरकारी विभाग फिर निर्माण व विकास कार्यों में ध्यान नहीं देते हैं। नागरिकों की अपेक्षा है कि सभी अधूरे काम तेजी के साथ अचारी संहिता लगने के पूर्व किये जाएं और चुनाव के दौरान भी कार्य चलते रहें जो पूर्व से स्वीकृत हैं। किसी भी परिस्थिति में विकास कार्य प्रभावित न हो इस बात का ध्यान रखने की अपेक्षा शासन प्रशासन से नागरिकों ने जताई है। मध्यप्रदेश के मण्डला जिले में इस संबंध में घोर लापरवाही बरती जा रही है। जिस पर शीघ्र ध्यान देने की मांग शासन प्रशासन से की गई है।
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24 घण्टे बिजली देने की योजना की हवा निकली
मंडला। बिजली गुल होने से नागरिकों का जीना मुश्किल हो गया है। जब देखो तब मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में बिजली गायब हो रही है। बिजली के न रहने से कई तरह के कार्य तो प्रभावित हो ही रहे हैं, लेकिन भीषण गर्मी में बिजली के गायब होने से नागरिक हलाकान हो गए हैं। पूरे जिले में बिजली की कटौती की जा रही है, जिससे लगभग सभी परेशान हैं। पता नहीं किन कारणों से बिजली गायब हो रही है। इन सभी कारणों को दूर करने की परिणामकारी कार्यवाही शासन प्रशासन द्वारा नहीं की जा रही है। मंडला जिले में अटल ज्योति अभियान अंतर्गत 24 घंटे बिजली देने की योजना का कियान्वयन शासन प्रशासन के आला अफसरों की घोर लापरवाही के चलते सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। नागरिकों को 24घंटे बिजली नियमित रूप से नहीं मिल पा रही है। पूरे जिले के नागरिक बिजली के गायब रहने से अत्यंत परेशान हो चुके हैं। एक तरफ बिजली के कभी भी गायब होने से लोगों की बढ़ी हुई है तो दूसरी तरफ अनाप शनाप बिजली बिल से लोगों को दोहरी मार झेलना पड़ रहा है। इस समय मडला जिले की तहसील नैनपुर के चिरईडोंगरी स्थित विद्युत मंडल कार्यालय अंतर्गत आने वाले लगभग सभी ग्रामों में अंधाधुंध तरीके से बिजली गायब की जा रही है। इस कार्यालय में पदस्थ सहायक यंत्री और संबंधित विद्युत कर्मियों की लापरवाही और मनमानी की वजह से संबंधित ग्रामों के नागरिकों को बिजली की लगातार की जा रही कटौती से परेशान होना पड़ रहा है। सूत्रों की माने तो यहां के पदस्थ बाबू और साहब और बाकी सब अमला उपभोक्ताओं से सीधे मुंह बात नहीं करते हैं, बाबू और साहब यहां पर रौब झाड़ते हैं, बिजली बिल ज्यादा आने पर या बिजली कटौती होने पर लोग यहां संपर्क करते हैं तो यहां पर पदस्थ साहब बिजली बिल कम करने का खर्चा-पानी मांगते हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि यहां पर पदस्थ साहब हमेंशा शराब के नशे में मस्त रहते हैं सूत्रों की माने तो साहब जब बिजली बिल कम करने का पैसा मांगते हैं तो इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि सांठ-गांठ करके उपभोक्ताओं को अनाप-शनाप बिल दिया जाता है और बाद में पैसा लेकर बिल कम कर दिया जाता है। प्रत्येक उपभोक्ताओं के बिल की जांच प्रत्येक ग्राम अनुसार की जावे तो सच्चाई सबके सामने आ सकती है। इसी कार्यालय के अंतर्गत पठार क्षेत्र के गांवों में संबंधित साहब की मेहरबानी से फर्जी लाइनमैन सरेआम काम कर रहे हैं। ये लाइनमैन बिजली सुधारने के नाम पर या बिजली लगाने के नाम पर अनाप-शनाप पैसा वसूलते हैं। मंडला जिले की तहसील नैनपुर के ग्राम परसवाड़ा सहित लगभग सभी ग्रामों में असमय बिजली गायब रहती है। इसके बाद लगातार बिजली गुल हो रही है और लोग परेशान हो रहे हैं। कुल मिलाकर शासन प्रशासन की लापरवाही से इस क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पूरे मंडला जिले में बेहिसाब तरीके से बिजली की कटौती की जा रही है जिसके लिए लोगों को आक्रोश उफान पर है। चिरईडोंगरी केन्द्र के सहायक उपयंत्री को तत्काल कार्यवाही करने की मांग नागरिकों द्वारा की जा रही है इसके अलावा मंडला जिले के संबंधित विभाग के आला अधिकारियों के खिलाफ भी दण्डात्मक कार्यवाही करने की मांग भी शासन प्रशासन से की गई है।
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अतिथि शिक्षकों पर कब मेहरबान होगी सरकार ?
लगातार कर रहे आंदोलन फिर भी नियमित नहीं कर रही सरकार
मंडला। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कब परिणामकारी कार्यवाही की जाएगी? अभी तक शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का वादा करने वाली मध्यप्रदेश की सरकार मौन साधकर बैठ गई है। नियमितीकरण की कार्यवाही कर सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों को स्थायी रूप से नियुक्ति प्रदान की जावे ताकि अतिथि शिक्षकों के साथ भी न्याय हो और शिक्षकों की कमी भी दूर हो। अतिथि शिक्षक परेशान हैं। इनकी परेशानियों को दूर करने के लिए शासन प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा सरकारी स्कूल भवनों की हालत खस्ता हो गई है जिनकी मरम्मत या रंगरोगन नहीं की जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में फैली तमाम तरह की समस्याओं का निराकरण कराने में शासन प्रशासन द्वारा कोई रूचि नहीं ली जा रही है। जनापेक्षा है सरकारी स्कूल भवनों की बदहाली ठीक की जावे। ज्ञात हो कि इस समय मध्यप्रदेश के मंडला जिले में अतिथि शिक्षक विगत कई दिनों से नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। कई तरह का विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं इसके बाद भी सरकार अतिथि शिक्षकों पर ध्यान नहीं दे रही है। कभी भूख हड़ताल तो कभी कफन ओढ़कर इनके द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। पूर्व व वर्तमान में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को शीघ्र ही नियमित किया जाए ऐसी जनापेेक्षा है।
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पंचायतों में चरम पर पहुंची मनमानी
शासन प्रशासन की बेहोशी का परिणाम, नागरिक परेशान
मंडला। शासन प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण ग्राम पंचायतों में मनमानी, धांधली और लापरवाही चरम सीमा पर पहुंच गई है। लगभग सभी ग्राम पंचायतों में यु़़द्ध स्तर पर रोजगार मूलक व अन्य कार्य शुरू व पूरे नहीं किये जा रहे हैं। अनेक काम अधर में लटके हुए हैं, जिन्हें पूरा करने की कार्यवाही शासन प्रशासन द्वारा नहीं की जा रही हैं। पंचायतों में मासिक बैठक नहीं हो रही है। पंचों को मासिक बैठक का पैसा पिछले कई वर्षों से नहीं मिल रहा है । ग्राम सभा मे पारित प्रस्तावों में कार्यवाही नहीं की जा रही है। वर्ष 2016-17, 2018-19 की लगभग सभी ग्रामसभा में पारित प्रस्तावो पर कोई भी कार्यवाही नहीं किये जाने का आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाये जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के कार्यालय नियमित रूप से नहीं खुल रहे हैं। सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक हमेशा गायब रहते हैं। ग्राम पंचायतों से संबंधित सीएम हेल्पलाईन और जिलास्तरीय जनसुनवाई की शिकायतों के निराकरण में भारी गोलमाल किये जाने की जानकारी मिल रही है। इस तरह की घोर लापरवाही शासन प्रशासन की बेहोशी की वजह से चरम पर पहुंच गई है। इसी तरह की घोर लापरवाही मंडला जिले की जनपद पंचायत नैनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के साथ साथ सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा किया जा रहा है लगभग 74 ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत नैनपुर में है लगभग सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य तेजी के साथ शुरू व पूरे नहीं किये जा रहे हैं जहां पर कई तरह के विकास कार्य ग्राम पंचायत में अधर में लटके हुये हैं। जिला पंचायत सीईओ व जिलाधीश भी पंचायतों में चल रही मनमानियों को दूर नहीं कर पा रहे हैं। जनापेक्षा है शासन प्रशासन शीघ्र ही लापरवाही दूर करे।
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आखिर कब दूर करेगा विपक्ष अपनी कमजोरी ?
.भाजपा सहित अन्य राजनैतिक दल नहीं उठा रहा जनहित के जरूरी मुद्दे
मंडला। कमजोर विपक्ष मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में ही नहीं बल्कि संपूर्ण मध्यप्रदेश में अपनी कमजोरी दूर नहीं कर पा रहे हैं। मध्यप्रदेश में कांग्रेसी सरकार है। विपक्ष की भूमिका भाजपा सहित अन्य राजनैतिक दलों के द्वारा सही तरीके से नहीं निभाई जा रही हैं। संख्या बल भी पर्याप्त है इसके बावजूद विपक्ष की भूमिका निभाने में खासकर भाजपा कमजोर ही साबित हो रही है। जनहित के सभी जरूरी मुद्दों को उठाने के लिए और उसे सुलझाने के लिए गंभीरतापूर्वक इनके द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अतिथि शिक्षक, साक्षर भारत मिशन के प्रेरक, रोजगार सहायक, सभी संविदा कर्मियों को नियमित कराने के लिए हर स्तर पर इनके द्वारा पुरजोर तरीके से मांग व आंदोलन नहीं किये जा रहे हैं। वचनपत्र के अनुसार किये गये वादों को पूरा कराने के लिए भाजपा सहित विपक्ष के सभी राजनैतिक दल, सत्तापक्ष से विशेष मांग या अन्य तरह का कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। मंडला जिले में तो विपक्ष की भूमिका निभाने में भाजपा व अन्य राजनैतिक दल विशेष ध्यान नहीं दे रहे हैं। मंडला जिले सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश में बेरोजगारी, गंदगी, बीमारी, धांधली और निरक्षरता चरम सीमा पर पहुंच गई है। सड़कों की हालत खस्ता है। सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को हाल बेहाल हैं। बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, कृषि, उद्यानिकी सहित जनहित के सभी जरूरी काम बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं। इसके अलावा कई तरह के विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। सरकार की योजनाओं को क्रियान्वयन कहां हो रहा है लोगों को ठीक तरह से पता नहीं चल पा रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि भाजपा व अन्य राजनैतिक दल मंडला जिले सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश में लगभग सभी स्तर पर जनहित के सभी मुद्दों को उठाने व उसे सुलझाने के लिए आखिरकार कब ध्यान देंगे
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निरक्षरता को दूर करने की सिर्फ की गई नौटंकी
ग्रामीण पुस्तकालय शुरू करने की दरकार, ध्यान दें सभी जवाबदार
मंडला। ग्रामीण क्षेत्र में पूर्व में पुस्तकालयों का संचालन किया जा रहा था। अचानक पुस्तकालयों का संचालन साक्षर मिशन योजना के शुरू करने से पहले बंद कर दिया गया है। कुछ सालों तक साक्षर भारत मिशन का संचालन किया गया। इस योजना के सभी कार्य पूर्ण नहीं किये गये और अचानक इसे भी बंद कर दिया। कुल मिलाकर निरक्षरता को दूर करने की आजादी के बाद से लेकर अब तक सिर्फ नौटंकी की गई है। यही है कि मां भारती के माथे से निरक्षरता का कलंक मिट नहीं पाया है। केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा मध्यप्रदेश के मंडला जिले सहित पूरे भारत में निरक्षरता को दूर करने के लिए न पहले सही प्रयास किये गये और न अब किये जा रहे हैं। निरक्षरता के अभिशाप से मुक्ति दिलाने के लिए ग्राम स्तर पर कार्य करने वाले प्रेरकों के साथ शुरू से लेकर अब तक सिर्फ अन्याय किया जा रहा है। इन्हें बिना लिखित आदेश के काम से निकाल दिया गया है। और कई बार मांग करने के बाद भी इनकी सेवा बहाली व नियमितीकरण की कार्यवाही भी नहीं की जा रही है। जनापेक्षा है कि शासन प्रशासन प्रत्येक ग्रामों में ग्रामीण पुस्तकालय शुरू किये जाएं। साक्षरता की नयी या पुरानी योजना शुरू की जाए और प्रेरकों की सेवा बहाली व नियमितीकरण की कार्यवाही शीघ्र की जावे।
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बंद नहीं हो रही धान खरीदी में लापरवाही
मंडला। धान खरीदी में धांधली लापरवाही चरम सीमा पर पहुंच गई है। निर्धारित समय अनुसार सभी खरीदी केन्द्रों में व्यवस्थित तरीके से धान की खरीदी नहीं की जा रही है। धान खरीदी के काम में शासन प्रशासन द्वारा घोर लापरवाही बरती जा रही है। कमीशनखोरी चरम पर पहुंच गई है। नापतौल में भी गड़बड़ी की जानकारी मिल रही है। पूर्व में जिन्होंने किसानों की फसल खरीदी में गड़बड़ी की है उनकी कोई जांच पड़ताल नहीं की जा रही है। डिठौरी धान खरीदी केंद्र में धांधली चल रही है। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में धान खरीदी की लापरवाही दूर की जावे ऐसी जनापेक्षा है।
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थम नहीं रहा लकड़ी का अवैध कारोबार
मंडला। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले को प्रकृति ने खूब नवाजा है। कई तरह की सम्पदा यहां पर मौजूद है लेकिन पहरेदारों के संरक्षण में लूट खसोट का कारोबार खूब चल रहा है। सभी को ज्ञात है कि खनिज सम्पदा की कैसी लूट हो रही है। इसी तरह वन सम्पदा की लूट का भी धंधा चल रहा है। मंडला जिले में जहां देखो वहां चर्चा हो रही है कि कीमती लकड़ी का अवैध कारोबार जिले के कई क्षेत्रों में किया जा रहा है कीमती लकड़ी जंगल से लाकर यहां-वहां शहरी क्षेत्र के अलावा कई क्षेत्रों में विक्रय की जा रही है । चर्चा चल रही है कि मंडला जिले में लकड़ी का अवैध कारोबार चल रहा है इसके अलावा कई विकासखण्ड में कीमती लकड़ी बेचने का कारोबार किये जाने की खबर मिल रही है। चर्चा है कि यह सब कुछ वनविभाग की सांठ-गांठ से हो रहा है। बताया तो यह भी जाया रहा है कि कीमती लकड़ी वनविभाग के संरक्षण में जंगल से लाकर फर्नीचर इत्यादि बनाकर मंडला व कई क्षेत्रों में विक्रय किया जा रहा है। बिल फर्नीचर मार्ट से सम्बंधितों द्वारा लेनदेन करके बनवाया जा रहा है। इस तरह का अवैध कारोबार वन सम्पदा को लूटने के लिए मंडला जिले में वनविभाग पूरी छूट दे रखा है। आरोप है कि इन्हें कमीशन की भारी रकम मिल रही है, सही क्या है जांच कराकर सरकार सत्यता जनता के सामने लाये।
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झूला पुल में मुसीबतों का अंबार
न लाइट लगा रहे और न हटा रहे अतिक्रमण
मंडला। माहिष्मती नगरी मंडला में नर्मदा नदी पर बना झूला पुल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। काफी लम्बे संघर्ष के बाद नागरिकों को नर्मदा नदी पर झूला पुल नसीब हुआ था लेकिन इस पुल से यातायात तो सुलभ हुआ किन्तु अंधेरे का साम्राज्य समाप्त नहीं हो पा रहा है। यहां पर रात्रि में बिजली की व्यवस्था न होने से नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पुल पर हमेशा रात्रि में अंधेरा छाया रहता है जिससे राहगीरों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। सभी जवाबदार पता नहीं कहां सो रहे हैं जवाबदारों को होश ही नहीं है कि यहां पर बिजली की व्यवस्था बेहद जरूरी है। बिजली न होने से राहगीर तो परेशान हो ही रहे हैं, दुर्घटना की संभावना भी बनी रहती है। बिजली की समस्या से जूझ रहे राहगीर अतिक्रमण से भी बेहद परेशान हैं। राहगीरों की माने तो पुल के आसपास किये गये अतिक्रमण से परेशानी और बढ़ गई है। झूलापुल अतिक्रमण की चपेट में आ गया है और यह सब संबंधित जवाबदारों के नाक के सामने हो रहा है और ये सभी बेहोशी का परिचय दे रहे हैं इन पर आरोप लग रहा है कि इनकी ही सांठगांठ से अतिक्रमण हो रहा है। नागरिकों की अपेक्षा है कि झूलापुल में बिजली की व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमण हो हटाने की कार्यवाही शीघ्र की जावे वरना यहां पर बड़ा हादसा हो सकता है।
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रेत चोरों पर सरकार मेहरबान
मंडला। खनिज माफियाओं के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। प्रकृति के अनमोल खजाने की लूट लगातार जारी है जवाबदारों की सांठ-गांठ से खनिज संपदा की लूट-खसोट का कारोबार खूब फल-फूल गया है। मंडला जिले में ऐसे कारोबारी खुलेआम रेत की चोरी कर रहे हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ रखा बैठा हुआ है। खनिज माफिया रेत की चोरी कर रहे हैं और इन्हें प्रशासन का पूरा संरक्षण प्राप्त है। प्रशासन खनिज माफियाओं पर शिकंजा कसने की बजाय संरक्षणवादी रवैया अपनाए हुए हैं और मीडिया खनिज माफियाओं की करतूत लगातार उजागर कर रहा है जिससे रेत चोर बौखला गये हैं। यदि जल्द ही खनिज सम्पदा की लूट का कारोबार बंद नहीं हुआ तो नागरिक उग्र आंदोलन करेंगे ऐसी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। सरकार शीघ्र ही खनिज माफियाओं की नकेल कसे यही जनापेक्षा है।
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सरकारी स्कूलों में पढ़ाई चौपट
.पूरे जिले में चरमराई शिक्षा व्यवस्था पर किसी का ध्यान नहीं
मंडला। सरकारी शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई लिखाई का स्तर काफी गिर गया है। अध्यापन कार्य प्रभावित होने की वजह से छात्र-छात्राओं का भविष्य लगातार अंधकारमय होता जा रहा है। शिक्षक मुख्यालय में नहीं रह रहे हैं समय-बेसमय जैसे तैसे अपनी सेवायें अप-डाउन कर दे रहे हैं। देर से आना और जल्दी चले जाना इनकी आदत बन गई है। अधिकांश शिक्षक तो पढ़ाई लिखाई की जगह मध्यान्ह भोजन व अन्य मामलों में उलझे रहते हैं स्कूली बच्चों को अध्यापन कार्य कराने के लिए इनकी विशेष रूचि नहीं रहती है। ऐसी स्थिति आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले के लगभग सभी सरकारी स्कूलों की काफी लम्बे समय से बनी है। कुल मिलाकर शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है जिसकी वजह से प्रायवेट स्कूल फल-फूल रहे हैं और लगातार सरकारी स्कूलों से बच्चों एवं अभिभावकों का मोह भंग होता जा रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि फिर सरकारी स्कूलों की आवश्यकता क्यों है। सरकार अनाप-शनाप धन खर्च कर रही है इन सबके बावजूद भी सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर दिनों दिन गिरता जा रहा है। मण्डला जिले की तहसील नैनपुर में संचालित हायर सेकेण्डरी स्कूल सालीवाड़ा इस समय काफी चर्चा में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां पर पदस्थ प्राचार्य व शिक्षक अपडाउन कर रहे हैं और मुख्यालय में नहीं रह रहे हैं। प्राचार्य के बारे में पता चला कि ये कभी-कभार ही स्कूल आते हैं। जिसकी वजह से स्कूल में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो शिक्षकों की लापरवाही के चलते अधिकांश छात्र-छात्रायें 2 बजे के बाद स्कूल से रवाना हो जाते हैं। खबर यह है कि यहां पर पढ़ाई तो होती ही नहीं है साथ में कई बार तो बच्चों की अटेंडेंस भी नहीं ली जाती है। यह स्कूल नैनपुर विकासखण्ड के पठार क्षेत्र का काफी पुराना स्कूल है इस स्कूल की प्रतिष्ठा शिक्षकों की करतूत की वजह से प्रभावित हो रही है। शिक्षक पढ़ाई लिखाई में ध्यान नहीं दे रहे हैं पूरे समय स्कूल में मौजूद नहीं रहते हैं देर से आते हैं और जल्दी चले जाते हैं। यहां का परीक्षा परिणाम भी हमेशा प्रभावित होता है बेहतर परिणाम लाने के लिए न पहले प्रयास किये गये और न अब किये जा रहे हैं। कुल मिलाकर हायर सेकेण्डरी सालीवाड़ा में पढ़ाई चौपट हो गई है और प्रशासन के आला अधिकारी यहां पर शिक्षा व्यवस्था दुरूस्त करने के लिए ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी तरह कई स्कूल में जिनमें पढ़ाई नहीं हो रही है जनापेक्षा है प्रशासन सभी सरकारी स्कूलों में नकेल कसने की परिणामकारी कार्यवाही करे और छात्र छात्राओं को बेहतर शिक्षा मिल सके इसके लिये विशेष ध्यान दे।
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सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बेहद बुरे हाल
.धांधाली, लापरवाही, मनमानी की भेंट चढ़ी चिकित्सा व्यवस्था
मंडला। स्वास्थ्य सेवाओं के बुरे हाल हैं। पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, अनाप शनाप पैसा खर्च किया जा रहा है जिसका कोई परिणाम नहीं निकल रहा है। गांव-गांव स्वास्थ्य केन्द्र बना दिये गये हैं। ग्रामीण क्षेत्र में संचालित स्वास्थ्य केन्द्रों में डाक्टर अपनी सेवायें नहीं दे रहे हैं कहीं चपरासी तो कहीं कम्पाउण्डर तो कहीं एएनएम के माध्यम से स्वास्थ्य केन्द्रों का संचालन हो रहा है जिसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सही तरीके से जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। नागरिकों का आरोप है कि जब जिला मुख्यालय में ही सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर नहीं है जब यहां ही स्वास्थ्य सेवायें के बुरे हाल हैं तो फिर ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली निश्चित है। इसी का फायदा उठाकर झोलाछाप डाक्टरों की दुकानदारी खूब फल फूल रही है। सरकारी संरक्षण में झोलाछाप डाक्टर इलाज के नााम पर मरीजों से लूट खसोट कर रहे हैं। झोलाछाप डाक्टरों को प्रशासन का पूरा संरक्षण है। सूत्रों का आरोप है कि झोलाछाप डाक्टरों को अवैध तरीके से चिकित्सा की दुकानदारी चलाने की छूट दे दी गई है। इस समय मण्डला जिले में झोलाछाप डाक्टरों की संख्या दिनोदिन बढ़ती जा रही है इन्हें नियंत्रित करने की कार्यवाही न पहले की गई और न अब की जा रही है। सूत्रों का आरोप है कि जो डिप्लोमा इनके पास रहता है उसके अनुसार इनके द्वारा मरीजों का उपचार नहीं किया जाता है होम्योपैथी या आयुर्वेदिक चिकित्सा का डिप्लोमा इनके पास हमेशा रहता है लेकिन ये डाक्टर एलोपैथी पद्धति से मरीजों का उपचार करते हैं। जानकारों के अनुसार ऐसा करना अवैध है यह सब जानकारी होने के बाद भी प्रशासन इन सबके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा है यह जांच का विषय हो गया है। जनापेक्षा है सरकारी चिकित्सा व्यवस्था मण्डला जिला में पूरी तरह ठीक किया जावे और झोलाछाप डाक्टरों की अवैध दुकानदारी पूरी तरह बंद किया जावे। ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यकतानुसार डाक्टरों की पदस्थापना की जावे सभी स्वास्थ्यकर्मियों को सक्रिय किया जावे इसके अलावा सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था को भी ठीक किया जावे इसके अंतर्गत सरकार काफी पैसा खर्च कर रही है लेकिन दवाइयों का उपयोग कौन कर रहा है यह जांच का विषय है । सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में मरीज काफी कम संख्या में उपचार कराने के लिए जाते हैं लेकिन दवाई तो शासन द्वारा पर्याप्त प्रदान की जाती है। सूत्रों का आरोप है कि दवाई संबंधितों के द्वारा गोलमाल कर दी जाती है। एलोपैथी व आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था ठीक करने की परिणामकारी कार्यवाही शीघ्र की जावे ऐसी जनापेक्षा है।
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मां नर्मदा नगरी मंडला में समस्याओं की कमी नहीं ?
समस्याओं से कराह रहे नागरिक, बेहोशी में सभी जवाबदार
मंडला। माहिष्मति नगरी मंडला में समस्याओं की कोई कमी नहीं है । इस नगर में जहां देखो वहां समस्या ही समस्या दिखाई देती है । साफ-सफाई का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है । नालियों में गंदगी बजबजाती रहती है। शहर की गलियों में गंदगी का अम्बार लगा रहता है । खुले में नर्मदा किनारे शौच व शहर के कई स्थानों में आज भी खुलेआम किया जा रहा है। सड़क पर दुकानदारों का कब्जा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। शहर की सड़क सिकुड़ती जा रही है और डिवाईडरों के बुरे हाल हैं। पार्को व उद्यानों की स्थिति बिगड़ती जा रही है शहर के अंदर पार्किग की व्यवस्था न होने से परेशानी बढ़ती जा रही है। वाहनों को खड़ा करने के लिए पार्किग स्थल बनाने में कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नगर में कई जगह आवश्यक होने के बाद भी बिजली की व्यवस्था नहीं की जा रही है। नर्मदा तटों का विकास ठप पड़ा हुआ है। नर्मदा तट पर बने घाट बुरी तरह जर्जर हो चुके हैं। सरकारी भवनों की स्थिति बेहद दयनीय है। मंडला नगर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए विशेष पहल की जा रही है। नगर मे जहां-जहां महापुरूषों के प्रतिमास्थल हैं वे सभी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। सौन्दर्यीकरण के प्रयास नगर में बिलकुल नहीं किये जा रहे हैं। मां नर्मदा की गोद में बसा यह शहर विकास की बाट जोह रहा है। यहां पर अवैध कारोबार का विकास जरूर हो रहा है । पूरा नगर समस्याओं की गिरफ्त में है नागरिक कई तरह की समस्याओं से त्रस्त हो चुके हैं। सड़कों की हालत खस्ता हो गई है। शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था भी यहां सही नहीं है। कुल मिलाकर नर्मदा नगरी मंडला में यूं तो कई तरह की सुविधाओं की जरूरत है जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है । जनापेक्षा है माहिष्मति नगरी मंडला का चहुंमुखी विकास किया जाये।
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धांधली की भेंट चढ़ा स्वच्छ भारत मिशन
.एक भी गांव व नगर नहीं हो सका खुले में शौच मुक्त
मंडला। स्वच्छ भारत मिशन के फर्जीबाजों ने मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के फर्जी तरीके से खुले में शौच मुक्त करा दिया है जबकि हकीकत यह है कि यह जिला आज भी खुले में शौचमुक्ति की बाट जोह रहा है । इस जिले में स्वच्छ भारत मिशन संबंधितों द्वारा अनाप शनाप पैसा हजम किया गया है जिसकी कोई विशेष जांच पड़ताल शिकायत होने के बावजूद भी नहीं की जा रही है। इस जिले में शौचालयों का निर्माण कार्य शत प्रतिशत पूर्ण नहीं हो पाया है। आधे अधूरे शौचालयों को पूरा नहीं किया जा रहा है। पहले बनाये गये घटिया शौचालय जर्जर हो चुके हैं जिनकी मरम्मत नहीं की जा रही है और नये शौचालयों का निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है। जिला मुख्यालय मंडला में ही नर्मदा तट के किनारे प्रशासन के नाक के नीचे खुलेआम शौच किया जा रहा है ऐसी स्थिति जिला मुख्यालय में है तो जिले के बाकी क्षेत्रों में ऐसी स्थिति होना आम बात है लेकिन बेशर्म फर्जीबाजों द्वारा फर्जी रिपोर्ट के आधार पर मंडला जिले को शासन के माध्यम से पिछले दिनों खुले में शौचमुक्त कराने की घोषणा करा दी गई है। जबकि हकीकत इसके उलट है। सूत्रों का आरोप है कि स्वच्छता प्रेरकों और सम्बंधित अधिकारियों द्वारा शासन प्रशासन को फर्जी जानकारी भेजी गई है और इसी से प्रभावित होकर सरकार ने मंडला जिले को खुले में शौच से मुक्त करने की घोषणा कर दी है। इस बात को लेकर नागरिकों में आक्रोश पनप रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि मंडला जिला कैसे में खुले में शौचमुक्त हो गया है? जनापेक्षा है स्वच्छ भारत मिशन के सभी कामों का भौतिक, मौखिक व दस्तावेज सत्यापन किया जाये और हकीकत के धरातल में खुले में शौचमुक्ति का काम किया जावे।
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विधायक देवसिंह सैयाम से नागरिक भारी नाराज
विकास में नही दे रहे ध्यान, नागरिक हलाकान
मंडला। मंडला विधानसभा क्षेत्र के विधायक व पूर्व राज्यमंत्री देवसिंह सैयाम के कामकाज से विधानसभा क्षेत्र के नागरिक संतुष्ट नहीं हैं। इन पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि विकास कार्यो में इनकी कोई खास रूचि नहीं रहती है। जनसम्पर्क करने और जनसमस्याओं के निराकरण कराने में भी ये ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। कई लोगों का आरोप यह भी है कि इन्हें मौखिक या लिखित रूप में कई बार समस्याओं से अवगत कराया जाता है लेकिन समस्याओं का निराकरण कराने में इनके द्वारा कोई परिणामकारी कार्यवाही नहीं की जाती है। मंडला विधानसभा क्षेत्र में तमाम तरह की समस्यायें मौजूद हैं। मंत्री रहने के बाद भी समस्याओं का निराकरण कराने में पूर्व में इन्होनें कोई रूचि नहीं ली। इस बार पुन: मोदी की लहर पर विधायक का चुनाव जीत गये और अब आराम फरमा रहे हैं। मंडला विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई की बड़ी समस्या है खासकर इनके ही निवास क्षेत्र के ग्रामों में जिसे पठार क्षेत्र के नाम से जाना जाता है सिंचाई की बड़ी समस्या सुलझ नहीं पा रही है। इस क्षेत्र में थांवर परियोजना अन्तर्गत डेम तो बना हुआ है लेकिन जलाशय का पानी दूसरे जिले के किसानों को मिल पा रहा है। पठार क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। मंडला विधानसभा क्षेत्र में पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी जैसी तमाम तरह की समस्यायें जस की तस बनी हुई है। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए विधायक देवसिंह सैयाम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र में ग्राम पंचायतों व नगरपालिका के कार्यो की भी समीक्षा जनपद व जिलास्तर पर इनके माध्यम से नहीं की जा रही है जिसकी वजह से अनेक कार्य लटके हुए हैं । विधायक निधि का इस्तेमाल इनके द्वारा कैसे किया जा रहा है यह भी किसी को पता नहीं चल पा रहा है। विधानसभा में जनहित के कौन-कौन से मुद्दे उठाये जा रहे हैं और उन पर क्या कार्यवाही हो रही है नागरिकों को कोई जानकारी किसी भी माध्यम से नहीं मिल पा रही है। कई लोगों का आरोप है कि ये विधानसभा में कोई खास मुद्दे नहीं उठा रहे हैं। अन्य स्तर पर भी जनहित के मुद्दों को सुलझाने के लिए इनके द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बेहद निष्क्रिय तरीके से ये अपना समय गुजार रहे हैं जिसकी वजह से नागरिकों में इनकी लापरवाह कार्यशैली पर नाराजगी बढ़ती जा रही है। जनापेक्षा है भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और संगठन के तमाम पदाधिकारी इन्हें शीघ्र सक्रिय करें और समस्याओं के निराकरण कराने में इनका महत्वपूर्ण योगदान हो इस सम्बंध में सख्त निर्देश जारी करें। इनका कार्यालय जिला मुख्यालय में कहां संचालित हो रहा है यह भी पता नहीं चल रहा है। कार्यालय भी नियमित रूप से संचालित किया जावे ऐसी जनापेक्षा है।

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