ब्याज जीरो-किसान हीरो के प्रणेता, गौरीशंकर बिसेन

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हेमेन्द्र क्षीरसागर, लेखक, पत्रकार व विचारक

एक मध्यमवर्गीय कृषक परिवार में जन्म लेने के कारण कृषकों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीणजनों की समस्याओं से अच्छी तरह वाकिफ आम आदमी की तरह सहज-शैली, व्यक्तित्व और जन-रागात्मकता से युक्त ठेठ देशी अंदाज में अपनी बात रखने वाले गौरीषंकर बिसेन का बचपन से ही गांव की माटी व गांव की गलियों से गहरा नाता रहा। ग्रामीण को ठगते निरंकुश-तंत्र के खिलाफ अपनाते बगावती तेवर ने ही अंतस में विद्यमान नेतृत्व क्षमता को जगाने में मुख्य भूमिका निभाई। सही मायनों में ये छोटे-छोटे लोगों के बडे-बडे कामों को अमलीजामा पहनाने के कारण ही आम लोगों के खास नेता हैं। फलस्वरूप साफगोई नीति और नैतिकता की राजनीति के अजात शत्रु बन चुके है। अभिष्ट, श्री बिसेन को वर्ष 2008 में प्रदेश के मुख्यमत्री शि‍वराज सिंह चैहान ने हर घर नल, हर घर जल और ब्याज जीरो-किसान हीरो की परणिति के बोध से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के साथ-साथ सहकारिता विभाग के मंत्री का दायित्व सौंपा था। इसके प्रणेता बनकर जवाबदेही को जनहित में सफलता पूर्वक निभाने के उपरांत आप 2013 से कृषक कल्याण व कृषि विकास मंत्री के रूप में खेती को लाभ का धंधा बनाने के अभिप्राय जी-जान से जुटे रहे हैं।

स्तुत्य, गौरीषंकर बिसेन का मानना है, कि कृषि लागत में कमी और उत्पादन बढने से ही बढती महंगाई व बेरोजगारी पर अंकुश लगाया जा सकता हैं। अतिरेक प्रति व्यक्ति आय बढने के साथ-साथ विकास दर भी उच्चतम स्तर को प्राप्त कर सकती हैं। क्योंकि आम जीवन में आर्थिक प्रगति की दृष्टि से कृषि में आत्मनिर्भरता और सहकारिता प्रणाली सर्वाधिक कारगर सिद्ध हुई हैं। अभेद्य भारतीय जीवन का मूल दर्शन सहकारिता अर्थात् सब साथ मिलकर चलना व प्रत्येक कार्य में सामाजिक व सार्वजनिक सहभागिता निभाना हमारा सर्वोपरि मानवीय मूल्य हैं।

बहरहाल, राष्ट्रपति ने प्रदेष को पांचवी बार ‘ कृषि कर्मण एवार्ड ‘ से सम्मानित किया, वहीं उच्चतम कृषि विकास दर के लिए भी प्रदेश को नवाजा गया। भांति विगत पांच वर्षो में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सुविख्यात विशेषज्ञों की अनुशसा पर मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ कृषि राज्य श्रेणी में ‘ एग्रीकल्चर लीडरषीप एवार्ड ‘ मिला। अभिभूत देश में प्रदेश की कृषि की विकास दर क्षितिज पर आसिन होना श्री बिसेन के लक्ष्यभेदी अभियान का प्रतिफल रहा।

लिहाजा, 01 जनवरी 1952 को बालाघाट जिले के ग्राम लेंडेझरी में जन्में किसान चतुर्भुज बिसेन के सुपुत्र गौरीशंकर बिसेन ने एमएससी की उपाधि प्रथम श्रेणी में हासिल की। शासकीय सेवा को न चुनते हुए, जनसेवा को अपना पेथ्य माना। चैतन्य 1970 के दशक में उत्पन्न राजनीतिक हालातों में बाबू जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रभावित होकर समग्र क्रांति जनांदोलन में अपनी शक्ति को सत्तापक्ष की निरंकुशता के खिलाफ प्रदर्शन में झोंक दिया। इस युवा किसान नेता ने 1977 में उस समय पं. नंदकिशोर शर्मा जैसे प्रदेश के दिग्गज, प्रभावशाली कांग्रेसी नेता को अपने नेतृत्व का एहसास कराया। जब प्रदेश में यह आम धारणा रही कि पं. शर्मा को चुनौती देना किसी के बूते की बात नहीं हैं। इस विधानसभा चुनाव में हालांकि श्री बिसेन हार गए लेकिन 1985 के विधानसभा चुनाव में श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या से कांग्रेस के प्रति उत्पन्न सहानुभूति लहर के दौरान भी वे कांग्रेस के गढ बालाघाट से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए।

किसानों के किसान नेता बिसेन ने पहली बार विधायक निर्वाचित होते ही अपने उत्कृष्ट कार्य व मिलनसारिता से मान्य नेतृत्व को प्राप्त करते हुए लगातार विजयश्री अर्जित की। वे सन् 1990, 1993, 2003, 2008, 2013 और 2018 में बालाघाट विधानसभा से विधायक चुने गए। 1998 एवं 2004 में उन्होंने बालाघाट लोकसभा क्षेत्र का अद्वितीय सर्वस्पर्शी प्रतिनिधित्व किया। प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष और भाजपा के दो बार प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए जनताजर्नादन की समस्याओं को प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर अपनी अद्भूत संगठन क्षमता का विलक्षण परिचय भी दिया। वहीं बालाघाट लोकसभा चुनाव में निरंतर भाजपा का परचम लहराना इनकी दूरदृष्टिता और कुषल नेतृत्व का जीता-जागता परिणाम है। यथेष्ठ, प्रदेश के चतुर्दिक विकास के अभिप्राय लोगों के जननायक अपने भाऊ गौरीशंकर बिसेन सांगोपांग भाव से गत चार दशक से प्रयासरत हैं। ऐसी मर्मस्पर्शी प्रयोगधर्मी और जमीनी अजातशत्रु को नववर्ष के शुभ अवसर पर अवतरण दिवस की हार्द्धिक शुभकामनाएं…..।

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