इंडियन कॉफी हाउस सोसायटी कर रही व्यापार

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क्षेत्रीय युवाओं को नहीं मिल रहा रोजगार

आलेख-आशीष जैन (जबलपुर दर्पण)
9424322600
ashishjain0722@gmail.com

इंडियन कॉफ़ी हाउस भारत में एक रेस्तरो की श्रृंखला है, जो श्रमिक सहकारी समितियों के द्वारा संचालित की जाती है। लगभग चारसौ कॉफी हाउस के साथ भारत की टॉप टेन सहकारी समितियों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इंडियन कॉफी हाउस ने जबलपुर में अपनी 9वी शाखा खोली। जबलपुर में इंडियन कॉफी हाउस वर्कर्स को ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड का प्रधान कार्यालय है । दस कॉफी हाउसों की श्रंखला के साथ मध्य प्रदेश में 35 से अधिक शाखाएं हैं। इंडियन कॉफी हाउस शहर में छात्रों का एक लोकप्रिय स्थान है । कुछ पुरानी शाखाएं बुजुर्ग एवं उम्रदराज लोगों को खुशियां प्रदान करती हैं। यहां प्रमुख बैठकें और मेल मिलाप होते हैं।

एक जमाना ऐसा भी था, जब देश के कई शहरों में बौद्धिक विचार विमर्श राजनीतिक साहित्यिक चर्चा के बैठक केंद्र इंडियन कॉफी हाउस हुआ करते थे । एक दौर ऐसा भी आया जब इंडियन कॉफी हाउस को कम्युनिस्टों का क्वालिटी टाइम जोन भी कहा जाता था। बेहतरीन अतिथि सेवा स्वच्छ साफ माहौल के साथ मुस्कुराते चेहरे आम होटलों से इससे बेहतरीन बनाते थे यह उस दौर का स्टेटस सिंबल भी बन गया था। अंग्रेजों के शासन काल में सन 1940 में इंडियन कॉफी हाउस को जन्म हुआ। उसी दौरान कॉफी के बीज कॉफी के उत्पादन के प्रचार के लिए भारत कॉफी बोर्ड बनाया गया अंग्रेज अपने मैम व दोस्तों के साथ कॉफी हाउस में बैठकर गरम-गरम कॉफी की चुस्कियां लिया करते थे। आजादी के बाद इस बोर्ड से कर्मचारियों की छटनी होने से खलबली मची और लेबर यूनियन ने भी खुलकर विरोध किया तब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड ए के गोपालन एवं प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु जी ने कोआपरेटिव सोसाइटी का गठन किया और इंडियन कॉफी वर्कर्स को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड अस्तित्व में आई और पहला कॉफी हाउस 1957 में नई दिल्ली में खोजा और बाद में इंडियन कॉफी हाउस का विस्तार देश के तमाम प्रमुख शहरों में किया गया सर्वाधिक केरल में कॉफी हाउस हैं। करीब 61 साल बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में कॉफी हाउस की संचालन के लिए महिलाओं को काम पर रखा गया इसके पहले सिरपुर उसी काम करते थे।

वर्तमान में एक विवाद बहुत जोर पकड़ रहा है कि इंडियन कॉफी हाउस कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड द्वारा संचालित कॉफी हाउसों की श्रंखला में सभी सरकारी नियम कायदे कानूनों ताक में रखकर किसी राज्य विशेष के कर्मचारियों की ही नियुक्ति की जा रही है। जबकि सोसायटी एक्ट अधिनियम के प्रावधानों में विस्तृत रूप से विवरण मिलता है कि संचालित सोसाइटी में क्षेत्रीय व उस राज्य के कर्मचारियों की ही नियुक्ति करना अनिवार्य है पर ऐसा किसी भी इंडियन कॉफी हाउस की शाखा में देखने नहीं मिलता। सोसायटी के नाम पर सरकारी सुविधाओं का ले रहे पूरा लाभ और संसाधनों का दोहन कर रहे ।कम लीज रेंट और किराए पर सस्ता भवन लेने के बाद भी स्थानीय युवकों को रोजगार नहीं देता। मध्य प्रदेश राज्य सरकार के द्वारा उद्योग एवं व्यापार के लिए जो नई नीति बनाई गई है उसमें यदि किसी यूनिट में कर्मचारियों की जरूरत है और रोजगार का सृजन होता है तो 70% स्थानीय युवकों को रोजगार देना ही होगा। यदि इस नियम का पालन नहीं किया जाता तो किसी भी तरह से सरकारी सुविधाओं का लाभ उस यूनिट को नहीं मिल सकता यह पूरी तरह से गलत माना जाएगा और सरकारी संसाधन के दोहन कर नियम का सीधा उल्लंघन माना जाता है। इंडियन कॉफी हाउस को सामाजिक सरोकार से कोई मतलब नहीं है नो प्रॉफिट नो लॉस पर संचालित होने वाली है संस्था हकीकत है अच्छा खासा मुनाफा कमा कर समाज को इसके बदले यह कुछ भी नहीं देते कभी उन्होंने कोई पौधारोपण नेत्र-हैल्थ शिविर आयोजित नहीं किया बस सरकार के संसाधन का उपयोग कर बदले में समाज को कुछ लौटाने के मामले में कोई भूमिका नहीं रखते। इस तरीके के रवैया से कई प्रकार के सवाल उत्पन्न होते हैं।

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