सेवा निवृत्ति पर दी गई भावभीनी विदाई

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कर्मचारी नौकर नहीं मालिक बनकर काम करें: बीएस बाजपेयी

छतरपुर। मध्यांचल ग्रामीण बैंक में 37 साल अपनी सेवाएं देने के बाद क्षेत्रीय महाप्रबंधक के पद से बीएस बाजपेयी 30 नवम्बर को सेवा निवृत्त हो गए। श्री बाजपेयी को मध्यांचल ग्रामीण बैंक छतरपुर एवं पन्ना जिले की 74 ब्रांचों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने छतरपुर के एक स्थानीय होटल में भावभीनी विदाई दी। इस मौके पर सभी लोग भावुक हो गए। मूलतः छतरपुर जिले के अनगौर निवासी श्री ब्रम्हस्वरूप बाजपेयी ने 1982 में सागर जिले की ढाना ब्रांच से शाखा प्रबंधक के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। 37 साल के इस लंबे सफर में श्री बाजपेयी विभिन्न शाखाओं में विभिन्न पदों पर रहते हुए क्षेत्रीय महाप्रबंधक के पद तक पहुंचे वे पिछले दो सालों से मध्यांचल ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय छतरपुर में महाप्रबंधक के पद पर पदस्थ थे। 30 नवम्बर को जब वो सेवा निवृत्त हुए तो उन्हें विदाई देते समय उनके स्टाफ के सभी कर्मचारी भावुक हो गए।
विदाई समारोह के मौके पर श्री बाजपेयी के सह कर्मी रहे तमाम शाखा प्रबंधकों ने उन्हें एक योग्य, ईमानदार, मिलनशार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी बताते हुए कहा कि श्री बाजपेयी जी ने अपने अधिनस्थ कर्मचारियों को जो प्यार और स्नेह दिया है उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी डांट फटकार में भी अपनत्व और परिवार भाव छिपा रहता था। ऐसे निष्ठावान अधिकारी की भरपाई संभव नहीं है। श्री बाजपेयी जी का हमेशा ही प्रशासनिक अधिकारियों से अच्छा ताल-मेल रहा जिस कारण कभी भी बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों को काम करने में परेशानी नहीं गई। इतना ही नहीं उनकी मिलनसारिता के कारण बैंक का व्यवसाय बढ़ा और बैंक ने काफी तरक्की की।  श्री बाजपेयी ने अपने संक्षिप्त और सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में बैंक के हितों को पहले पायदान पर रखा है। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी अपने आप को नौकर न समझ कर मालिक समझकर काम करे तो वह और अधिक जिम्मेदारी व मजबूती के साथ काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय प्रबंधक रहते हुए उनके अधिनस्थ कर्मचारियों ने उन्हें भरपूर सहयोग दिया। जिस कारण वे अपने काम में सफल हो सके। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने अधिनस्थ कर्मचारियों को दिया और कहा कि मैं भाग्यशाली थी जो उन्हें अच्छे कर्मचारियों का साथ मिला। उन्होंने कहा कि सेवा निवृत्ति जीवन की एक अनिवार्य प्रक्रिया है सेवा निवृत्त होने के बाद भी बैंक को और बैंक के कर्मचारियों को जब भी मेरी जरूरत महशूस होगी मैं सदेव उसके लिए तैयार रहूंगा। कार्यक्रम के अंत में सभी ने उन्हें शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके उज्जव भविषय की कामना की।

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