श्री युगेश शर्मा की पुस्तक “गांधी पथ” का विमोचन

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भोपाल। गांधी भवन में सुप्रसिद्ध पत्रकार एवम वरिष्ठ साहित्यकार श्री युगेश शर्मा की पुस्तक “गांधी पथ” का विमोचन बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ।
कॉर्यक्रम की अध्यक्षता तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष श्री रमाकांत दुबे जी ने की , मुख्य अतिथि गांधी दर्शन के महान चिंतक और विचारक श्री सुब्बा राव, विशेष अतिथि गण सर्व श्री रघु ठाकुर, कैलाश चंद्र पन्त, दयाराम नामदेव, भूपेंद्र गुप्ता, और एन के मोदी जी भी मंचासीन रहे।
संचालन सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री लक्ष्मी नारायण पयोधि ने किया। पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए गाँधी भवन के सचिव श्री दयाराम नामदेव ने कहा कि गांधी जी का पथ लोकपथ बनेगा, तभी गांधी जी की आकांक्षा पूर्ण होगी यह दायित्व हमारा है, जो शहरों में बैठकर नहीं हो सकता।

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श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति, विधान सभा अध्यक्ष का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया जिसमें उन्होंने कहा कि पुस्तक के विचार आज भी प्रासंगिक हैं श्री भूपेद्र गुप्ता जी, सामजिक कार्यकर्ता एवम चिंतक के विचार थे कि आज गांधी जी के विचारों पर चलने वाला समाज विलुप्त होता जा रहा है। एक नया समाज जो फेस बुक और सोशल मीडिया की पीढ़ी का है, उस समाज को गांधी जी के विचारों को समझने में इस पुस्तक से काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने जब पहला आंदोलन किया, तो 10 हजार मजदूरों से हस्ताक्षर कराए और जब वे इन हस्ताक्षरों को देखते थे, जो भारत की विभिन्न भाषाओं में होते थे, तो उनको देखकर वे यह सोचते थे कि सम्पूर्ण दुखी भारत तो यही है। उनकी हत्या का प्रयास भारत में ही नहीं दक्षिण अफ्रीका में भी हुआ पर कई संकटों और परीक्षाओं से गुजरकर वे कुंदन बन गए।
श्री कैलाश चंद्र पन्त ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री युगेश शर्मा जी द्वारा लिखित *पुस्तक में वर्णित काल खंड और आज के काल खंड में बहुत अंतर है, आज छुआछूत की स्थिति वैसी नहीं है।* गांधी जी ने कहा था कि मेरे नाम से कोई वाद न चलाया जाए। मैंने वही कहा है जो वर्षों से महान लोग कहते आये हैं। गांधी जी के 150 वें वर्ष मनाते हुए आज उनकी चर्चा की आवश्यकता इसलिए है कि जो बातें उन्होंने कहीं उनको सैद्धांतिक रूप में जीवन में उतारने की आवश्यकता है। सत्य और अहिंसा आज भी पूरे विश्व को आवश्यक है। उनके बताए सूत्रों की चर्चा यह पुस्तक करती है। आज गांधी जी के सिद्धांतों को पुनः व्याख्यायित करने की आवश्यकता है।

समाजवादी चिंतक श्री रघु ठाकुर ने पुस्तक “गांधी पथ” के बारे में कहा कि बहुत दिनों के बाद एक सकारात्मक पुस्तक सामने आई है। आजादी के 72 साल बाद भी आये दिन अछूतों के साथ दबंगों की हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती हैं। गांधी का पथ बताता है कि बुराइयों को पहचानकर, स्वीकार कर उनको समाप्त किया जाये।

न्यायमूर्ति श्री एन के मोदी जी, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे और उच्चतम न्यायालय में वकालत कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि वास्तव में “गांधी पथ” पुस्तक ऐसा ही व्यक्ति लिख सकता है जो गांधी जी के बताए रास्ते पर चल रहा हो।
आज भी हिंसक और शोषक वर्ग कम है, गांधी के सिद्धांतों पर चलने वाला अहिंसक समाज अधिक है। आज सरकारें गांधी जी का विज्ञापन अधिक करती हैं, उनके विचारों पर कम चलती हैं।
पुस्तक के लेखक श्री युगेश शर्मा जी ने कहा कि आज मेरे बोलने का नहीं, सुनने का दिन है। मैंने पूरा प्रयास किया हैं, कि गांधी जी के विचारों को अपने आचरण में उतारूं। मैंने गांधी जी पर जो दो किताबें लिखी हैं, वे मेरे विचारों का प्रतिबिंब हैं।

मुख्य अतिथि श्री सुब्बाराव जी का मत था कि लोग गाँधी गाँधी तो रटते हैं पर सिद्धांतों का पालन नहीं करते। यहां हर हाथ में घडी होती है पर समय का अनुपालन कोई नहीं करता। जीत हासिल करने के दो तरीके होते हैं, एक बन्दूक का तरीका, दूसरा संदूक का तरीका। यदि इन दो तरीकों से हटकर किसी अन्य तरीके से जीत हासिल हो तब माना जायेगा कि हम गांधी के रास्ते पर चल रहे हैं। गांधी जी ने एक अवसर पर अंग्रेजों को जवाब दिया था कि आपके पास पुलिस की, मिलिट्री की शक्ति है, पर मेरे पास जो आत्मबल है, उसके रहते मैं आप लोगों का मुकाबला करूंगा। आदिकाल के ऋषियों से लेकर आज तक हुए धर्म गुरुओं का एक ही सन्देश रहा है कि अपने अंदर के ईश्वर को पहचानो, गांधी ने इसे पहचान लिया था तभी देश को आजाद करा पाये। श्री सुब्बाराव ने ध्यान योग की शक्ति से भी जनता को परिचित कराया और गाँधी आश्रम में होने वाली प्रार्थना गाकर सबको शामिल किया।

अध्यक्ष श्री रमाकांत दुबे ने पुस्तक विवेचना करते हुए कहा कि श्री युगेश जी ने नाटक की भाषा बहुत उत्तम चुनी है। नाटक के पात्रों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तक की भाषा बहुत उत्तम और परिमार्जित है। पुस्तक बहुत जनोपयोगी है।
अंत में श्री महेश सक्सेना ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा, कि भाई युगेश जी की पुस्तक “गांधी पथ” का विमोचन “गांधी भवन” के मोहनिया कक्ष में प्रकाश पर्व पर होना कई तरह के सुखद संयोगों का समन्वय है। उन्होंने अतिथियों का एवम उपस्थित साहित्यकारों का आभार माना।
कॉर्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी संजीव श्रीवास्तव, गौतम सिंह, जे.एस. चौहान डायरेक्टर, एस.ए.टी.टी.आई., विदिशा, एस.एस. कुशवाह कुलसचिव आर.जी.पी.वी. वरिष्ठ साहित्यकार डा देवेंद्र दीपक, डा सुमन चौरे, दयाराम वर्मा, उपन्यासकार, गोकुल सोनी,इफ़्तेखार अयूब आदि साहित्यकारों के साथ ही बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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