कविता शालिनी शालिनी रहांगडाले

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बालाघाट कावित्री
 एक बार उसे खुश तो रखो,
              ख्याल ना रखा तुम्हारा,  तो कहना |
एक बार उसे समझ कर तो देखो ,                                                      
           सहारा ना बना तुम्हारा , तो कहना |
एक बार उसके साथ तो बैठो ,
            शांति ना मिली तुम्हें,  तो कहना |
 एक बार उसके दुख को महसूस तो करो, 
              कष्ट का आभास ना हो , तो कहना |
एक बार उससे अपना तो समझो , 
              पराया महसूस ना होने देगी,  तो कहना |
एक बार उसे प्यार करके तो देखो ,
               दुखी ना होने देगी कभी,  तो कहना |
  एक बार मिलती जिंदगी साथ जियो तो,
               सुख ,शांति ,मजा ना मिला ,  तो कहना |
स्त्री जीवन का आधार, पुरुष जीवन की नीव ||

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